देहरादून जिला चिकित्सालय में मरीजों को अब खून की जरूरत पड़ने पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। मंगलवार को जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट परिसर में राजकीय जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन) देहरादून की चिकित्सा प्रबंधन समिति की प्रथम त्रैमासिक बैठक आयोजित हुई। बैठक में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। जिसमें जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर अस्पताल को एक डेडिकेटेड ब्लड ट्रांसपोर्ट वाहन “रक्त गरुड़” मिलेगा। इसके अलावा अस्पताल में ब्लड बैंक का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इसी साल इसकी शुरुआत हो जाएगी।

रक्त गरूड क्या है, और क्या इसका कार्य है:

. रक्त गरूड़ एक ब्लड़ ट्रांसपोर्ट वाहन है, जिसे खून को तेजी से और सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

. उत्तराखंड के अस्पतालों में, विशेष रूप से देहरादून जिला चिकित्सालय में मरीजों को खून की जरूरत पड़ने पर रोगी या बीमार व्यक्ति की देखभाल करने वालो को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा।

. यह वाहन खून के पैकेट को अस्पताल से ब्लड बैंक या अन्य जगहों तक ले जाता है, जिससे मरीजों को समय पर खून मिल सके।

जिलाधिकारी ने अस्पताल से अधिक संख्या में प्रसव मामलों के रेफरल पर नाराजगी जताते हुए मसूरी स्थित गायनी विशेषज्ञ व कोरोनेशन अस्पताल में कार्यरत निश्चेतक की कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में यह भी बताया गया कि हिलांस कैंटीन और ब्लड बैंक का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है और जल्द ही इनका उद्घाटन होगा।

वहीं दूसरी ओर नवजात शिशुओं की देखरेख हेतु संचालित 6 बेड की एसएनसीयू यूनिट को बढ़ाकर 12 बेड का करने के निर्देश भी दिए गए। जिला चिकित्सालय में मरीजों का खाना उपलब्ध कराने के लिए ठेके पर चल रही कैंटीन बंद होगी। अब हिलांस कैंटीन के माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। यह किचन महिला स्वयं सहायता समूह संचालित करेंगे।

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